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वो जो कभी नही मरते

कल की उम्मीद ने आज के अच्छे होने की गुंजाइश को सिरे से खत्म कर दिया। कल से पढूंगा ने अनपढ़ बनाया। कल से मेहनत के निश्चय ने गरीब नाकारा बना दिया। कल सुबह की रोशनी के सपनों ने ज़िन्दगी में अंधेरा फैला दिया। एक दिन लायक बनने के ख्वाब ने नालायक बना दिया। कल की उम्मीद आज को, अभी को, वर्तमान को नष्ट कर देती है। जिसकी रुचि कल में है उसके लिए गुज़री हुई ज़िन्दगी नरक होती है। एक दरिद्र के पास उम्मीद के अलावा कुछ नहीं क्योंकि जब तक उसके पास उम्मीद है, सम्पन्नता उसके पास भटक भी नही सकती। तुम दरिद्रो, नालायकों को मंदिर, मज़ार पर अक्सर चक्कर लगाते पाओगे। क्यूंकि इन घाटों पर चक्कर लगाने का अर्थ है कि वो खाली है मायूस है।
सम्पन्न व्यक्ति के पास आज होता है और दरिद्र के पास कल। वर्तमान सच है कल धोखा। जीवन शील आदमी कभी ना भविष्य की बात सोचता है ना गुज़रे हुए कल की। उसके पास आज है दरिद्र के पास कल है दोनों कल गुज़रा हुआ भी आने वाला भी। भूतकाल और भविष्य दोनो दरिद्र और निकम्मे आदमी की संपत्ति है।
सपने संजोना सबसे आसान काम है और गुज़रे हुए कल पर रोना भी। सबसे ज़्यादा मुश्किल है आज में अभी में इसी क्षण में होना। क्योंकि जितने भी साहसी लोग हुए है वो सब आज में थे, है। क्योंकि वर्तमान ही वो समय है जिस पर इंसान का नियंत्रण है भूतकाल और भविष्य काल दोनो पर नियंत्रण असंभव है। अब इस क्षण में कुछ गुंजाइश है। जो आज कुछ नही कर रहा वो कल कुछ नहीं कर पायेगा ये प्रमाण है आज कुछ कर लेना प्रमाण आगे कुछ ना होने का। अगर कुछ होगा तो वो भी एक आज होगा। आज, अभी, इसी क्षण में सब छिपा है, सारी संभावनाए अभी में है। उम्मीदों की ज़िंदगी राख का ढेर है। समय ना कभी तीन भागों में था ना हो सकता। समय सदैव एक ही है वो है वर्तमान। वर्तमान में किया गया काम सदैव जीवंत रहता है। देखो जो पढ़ा था किया था वो भूतकाल था अभी भी है। बिल्कुल तुम्हारे हाथ मे शरीर मे रक्त बनकर दौड़ रहा है। उस आदमी को आज तक कोई नही मार पाया ना भुला पाया जिसने आज को किया। उसने आने वाले क्षण की कल्पना नही की थी। उसने हर हर सांस को जिया था इसी लिए उसका अस्तित्व खत्म नही हो पा रहा। वो आज भी जीवंत है। मरे तो वो जो भविष्य में जी रहे थे। सुनहरे भविष्य में। वो मेरे इसलिए कि वो कभी ज़िंदा रहे ही नही।
वर्तमान को जीना असल जीवन है। सच्चा जीवन। झूठे आदमी के पास भविष्य की योजनाएं होती है और सच्चे के पास वर्तमान। हज़ारों साल हो गए वो सांस लेने वालों से ज़्यादा ज़िंदा है हमसे भी ज़्यादा। उन्होंने एक क्षण भी भविष्य में गंवाया होता तो आज तक जिंदा ना होते। ये दरिद्र इंसानो का झुंड सांस लेती हुई लाशें है जो कल के मुनाफे की उम्मीद में आज दूसरोँ का ख़ून चूस चूस कर अपना कल तैयार कर रही है। वो कल जो कभी आएगा ही नही।

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